​होलाष्टक 2026: महत्व, तिथियां और ज्योतिषीय उपाय – ज्योतिषी श्वेता ओबेरॉय द्वारा

होलाष्टक 2026: महत्व, तिथियां और ज्योतिषीय उपाय – ज्योतिषी श्वेता ओबेरॉय द्वारा

होली केवल रंगों और खुशियों का त्यौहार नहीं है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी है। होली से ठीक आठ दिन पहले की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में साधना और शुद्धि का समय माना गया है।
महत्वपूर्ण तिथियां (2026)
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलाष्टक प्रारंभ होता है:

1️⃣होलाष्टक प्रारंभ: 25 फरवरी, 2026
2️⃣होलिका दहन: 3 मार्च, 2026
3️⃣धुलंडी (रंगों की होली): 4 मार्च, 2026


होलाष्टक का महत्व और सावधानियां
मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान ग्रहों का स्वभाव काफी उग्र रहता है। इसी कारण इन आठ दिनों में शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया व्यवसाय शुरू करना वर्जित माना जाता है। 
ज्योतिषी श्वेता ओबेरॉय के अनुसार, यह समय बाहरी कार्यों के बजाय आंतरिक शुद्धि और मंत्र साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
सुख-समृद्धि के लिए ज्योतिषीय उपाय
इस अवधि में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और ग्रहों को शांत करने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं

दान का महत्व: अपनी क्षमता अनुसार अनाज, गुड़ और वस्त्रों का दान करें। इससे राहु और शनि के दोष कम होते हैं।
मंत्र जाप: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप मानसिक शांति प्रदान करता है।

घर की शुद्धि: शाम के समय कपूर और गूगल की धुनी पूरे घर में दिखाएं, इससे नकारात्मकता दूर होती है।
रंगों का चयन: 4 मार्च को होली खेलते समय सबसे पहले भगवान को गुलाल अर्पित करें। पीले रंग का तिलक लगाना बृहस्पति देव की कृपा दिलाता है।

आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं!


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